10 most famous tourist places in Rishikesh: ऋषिकेश की 10 सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

10 most famous tourist places in Rishikesh

ऋषिकेश ऋषियों का धाम भारत के उत्तराखंड प्रदेश में पड़ता है ऋषिकेश जिसे योगा कैपिटल ऑफ़ द वर्ल्ड भी माना गया है ऋषिकेश हिंदू धर्म का एक बहुत ही पवित्र स्थल है जो टूरिस्ट और पर्यटकों के बीच भी बहुत ज्यादा फेमस है कहा जाता है कि श्री राम ने रावण का वध करने के बाद ऋषिकेश में ही जाकर तपस्या की थी और यहां का प्राचीन रघुनाथ मंदिर इस चीज का साक्षी है, आप सह परिवार तीन से चार दिन की छुट्टी बिताने ऋषिकेश आ सकते हैं तो आईए जानते हैं कि ऋषिकेश में 10 ऐसी कौन सी जगह है। जो आपको जरूर देखनी चाहिए।

Rishikesh

भगवान शिव की यह भव्य मूर्ति

परमार्थ निकेतन वो जगह है जहा से आप भगवान शिव की यह भव्य मूर्ति के दरसन कर सकते है। इस मूर्ति में आपको भगवान शिव बैठ के ध्यान लगाते हुए मिलेंगे जिसमें भगवान शिव की आंखें बंद है यह मूर्ति गंगा नदी के बीचों बीच बसी है और बिना सक के यह नजारा बहुत ही जबरदस्त है परमार्थ निकेतन आश्रम का नजारा जहां पर यह मूर्ति स्थित है अपने आप में बहुत ही शांत और सुंदर नजारा देता है यह मूर्ति तकरीबन 14 फीट ऊंची है और पर्यटकों के बीच यह बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है।

नीलकंठ महादेव मंदिर

नीलकंठ महादेव मंदिर एक बहुत ही प्राचीन मंदिर है जो की ऋषिकेश के पास मणिकूट पर्वत पर स्थित है पुराने पौराणिक के द्वारा ऋषिकेश की वह जगह है जहां पर शिव जी ने समुद्र मंथन के दौरान विष पिया था और वह विष पीने के बाद उनका गला नीला हो गया था इसलिए इस जगह का नाम नीलकंठ महादेव पड़ा है नीलकंठ महादेव मंदिर की दो स्पेशल बातें हैं सबसे पहले की यह मंदिर तीन पर्वतों से गिरा है जिसका नाम है मणिकूट ब्रह्मकूट और विष्णु कूट और दूसरी की इस मंदिर की रचना बहुत ही कलरफुल तरीके समुद्र मंथन करते हुए स्कल्पचर्स उनकी एंट्रेंस पर बने हुए हैं नीलकंठ महादेव का मंदिर ऋषिकेश से कम से कम 32 किलोमीटर दूर है और वहां पहुंचने मैं आपको लगेंगे तकरीबन एक घंटा अगर आप नीलकंठ महादेव मंदिर जा रहे हैं तो सुबह 6:00 बजे आप वहां पहुंच सकते हैं ताकि आप सुबह की भव्य आरती भी अटेंड कर सके।

नीलगढ़ वॉटरफॉल

नीलगढ़ वॉटरफॉल से 25 फीट ऊंचा वॉटरफॉल है जो की बना है तीन वॉटरफॉल मिलकर और नीलगढ़ वॉटरफॉल की सुंदरता देखते ही बनती है जब आप नीलगढ़ वॉटरफॉल जायेगे तो पाएंगे की यहाँ की खूबसूरती कहीं से भी बहुत ज्यादा अधिक है नीलगढ़ वॉटरफॉल जाने के लिए आपको 15 मिनट तक की पैदल ट्रैकिंग करनी पड़ सकती है जिसमें आप दो ब्रिज क्रॉस करेंगे जहां से पानी निरंतर बहता रहता है आपकी यह पूरी जर्नी किसी भी जर्नी से अनकंफरटेबल होगी नीलगढ़ वॉटरफॉल पहुंचने के लिए ऋषिकेश बस स्टैंड से 8:30 किलोमीटर का सफर करना पड़ेगा आप यह सफर प्राइवेट टैक्सी या फिर वहां की लोकल कैब से कर सकते हैं नीलगढ़ वॉटरफॉल जाने का सबसे सही समय है मानसून के बाद अक्टूबर या सितंबर में क्योंकि तभी सबसे सुंदर वॉटरफॉल देखने को मिलेगा नीलगढ़ वॉटरफॉल की एंट्री फ्री है बिना कोई पैसे दिए जा सकते हैं वहां जाने के लिए आप अपने साथ थोड़ा खाना और पानी भी रख सकते हैं ताकि आपकी ट्रैकिंग एक पिकनिक में बदल जाए हमारा सजेशन रहेगा कि वहां जाने के लिए आप अपने साथ एक्स्ट्रा कपड़े भी लेकर चले क्योंकि क्या पता कि वहां जाती आपका नेचर का मजा लेने का मन कर जाए।

बीटल्स आश्रम

बीटल्स आश्रम ऋषिकेश उत्तराखंड की एक बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है बीटल्स आश्रम गंगा रिवर के पूर्वी में स्थित है जो की मुनि की रेती एरिया के अपोजिट है यह आश्रम महर्षि महेश योगी के स्टूडेंट्स के लिए ट्रेनिंग सेंटर था इस आश्रम को इंटरनेशनल रिकॉग्निशन तब मिली जब 1968 में इंग्लिश रॉक बैंड दा बीटल्स यहां पर मेडिटेशन करने आए यह माना जाता हैकि यहां पर स्पेंड करने वाला उनका पीरियड उनका सबसे प्रोडक्टिव पीरियड था और यहीं पर उन्होंने अपने सबसे फेमस गाने लिखे बीटल्स आश्रम को 1990 में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के हवाले कर दिया गया था जिसके बाद यह जगह बीटल्स आश्रम के नाम से मशहूर हो गई और और फिर दिसंबर 2015 में इसको लोगों के लिए खोला गया और उसके बाद यह जगह बीटल्स के फैन बेस के लिए एक बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बन चुका है मीटर आश्रम में जाने की टाइमिंग है सुबह 10:00 बजे से लेकर 4:00 बजे तक और यहां जाने की कोई फीस नहीं है इट इस फ्री ऑफ़ कॉस्ट अगर आप यहां मेडिटेशन करने जा रहे हैं तो अपना खुद का नेट लेकर जाएं और अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें और अगर आपके साथ बच्चे हैं तो आप यह जगह अवॉयड कर सकते हैं क्योंकि यहां पर प्राइम या व्हीलचेयर चलाने के लिए जगह नहीं है।

त्रयंबकेश्वर मंदिर ऋषिकेश

त्रयंबकेश्वर मंदिर ऋषिकेश जो कि तेरा मंजिला मंदिर के नाम से भी बहुत मशहूर है, त्रयंबकेश्वर मतलब तीन आंख वाले भगवान जो कि हिंदू माइथोलॉजी के हिसाब से लॉर्ड शिवा है त्रयंबकेश्वर मंदिर से गंगा जी का नजारा अभूतपूर्व है और इस मंदिर से आप लक्ष्मण झूला भी देख सकते हैं त्रयंबकेश्वर मंदिर की सीढ़ियां 13 मंजिल ऊपर त्रयंबकेश्वर भगवान तक जाती हैं और यहां के लोकल जी मानती है कि यह मंदिर आदि शंकराचार्य ने आठवीं और नौवीं सदी के आसपास बनवाया था त्रयंबकेश्वर मंदिर में कोई लिफ्ट और एलीवेटर नहीं है आप व्हीलचेयर नहीं ला सकते तो आप इसी हिसाब से यहां पर आने की अपनी प्लानिंग कर सकते हैं।

श्री भरत मंदिर

भरत मंदिर जो की ऋषिकेश के बीचो-बीच स्थित है और यहां आने के लिए आपको ज्यादा समय नहीं लगेगा यह मंदिर रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर और बस स्टॉप से सिर्फ एक किलोमीटर दूर है राध्या ऋषि और सोम ऋषिजी की कठोर तपस्या के बाद भगवान विष्णु ने उनसे प्रसन्न होकर माया रूप में उनको यहां पर दर्शन दिए थे और साथ ही साथ विष्णु जी ने कहा था कि कलयुग में भरत नाम से यह मंदिर यही स्थापित होगा भारत मंदिर में 250 साल पुराना वट वृक्ष, पीपल और बेल पत्तों का पेड़ है जो कि हिंदू धर्म के हिसाब से ब्रह्मा जी विष्णु जी और शिवजी के होने का साक्षी है और इसी वजह से यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच बहुत मशहूर है भारत मंदिर घूमने में आपको तकरीबन एक घंटा लग सकता है और इस मंदिर में आपको एक म्यूजियम भी मिलेगा जो कि घूमने जरूर बनता है भरत मंदिर की टाइमिंग है सुबह 5:00 बजे से लेकर दोपहर 12:00 तक और शाम को 4:00 बजे से लेकर रात को 9:00 बजे तक भरत मंदिर जाने की कोई फीस नहीं है और यह मंदिर आना वसंत पंचमी और महाशिवरात्रि के दिन बहुत शुभ माना जाता है।

त्रिवेणी घाट की आरती

गंगा की आरती ऋषिकेश का एक बहुत ही पुराना रिचुअल है जो की बहुत समय से चला आ रहा है, यह आरती त्रिवेणी घाट से होती आई है और क्योंकि त्रिवेणी घाट एक बहुत ही फेमस घाट है इसलिए आरती के समय यहां पर हमेशा भीड़ रहती है यह घाट पेशवा बालाजी बाजीराव के द्वारा बनवाया गया था 1748 में और पेशवा बालाजी बाजीराव ही वह पहले इंसान है जिन्होंने यहां पर गंगा की आरती करी थी माना जाता है कि अगर आप इस आरती में रहते हैं तो आपके सारे पाप धुल जाते हैं त्रिवेणी घाट में इस आरती का समय है शाम को 6:00 बजे से लेकर 7:00 बजे तक और इस आरती में आने की कोई भी फीस नहीं है हमारा सजेशन रहेगा कि अगर आपकी आरती करने आ रहे हैं तो तकरीबन आधे घंटे पहले पहुंची ताकि आपको आरती अटेंड करने की सही जगह मिल जाए त्रिवेणी घाट के आसपास और भी अच्छी जगह है घूमने की जैसे भरत मंदिर, गीता टेंपल और लक्ष्मी नारायण मंदिर तो आरती के बाद आप वह जगह भी घूम सकते हैं।

ऋषिकुंड

ऋषिकुंड ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट के निकट रघुनाथ मंदिर में स्थित है ऐसी मान्यता है कि इस कुंड का निर्माण कुब्ज ऋषि ने किया था ऋषि कुब्ज की तपस्या से पहले यह हवन कुंड हुआ करता था इसीलिए इस कुंड का आकार एक हवन कुंड की तरह है और ऋषि कुब्ज की तपस्या से प्रसन्न होकर यमुना जी इस कुंड में आई थी और इस बात का पता आज तक कोई नहीं लगा पाया है कि इस कुंड में यमुना जी का जल कहां से आया हिंदू मान्यताओं के हिसाब से जब श्री राम जी ने रावण का वध किया था तो ब्रह्म हत्या का दोष हटाने के लिए श्री राम जी ने यहां पर तपस्या की थी इसलिए जब भी आप ऋषिकुंड जाएंगे तो आपको वहां पर मां सीता और श्री राम जी की मूर्ति के दर्शन होंगे यह माना जाता है कि ऋषिकुंड तकरीबन 400 से 500 साल पुराना है इसीलिए यह जगह पर्यटकों के बीच बहुत ही प्रसिद्ध है लेकिन यहां जाने का सबसे सही समय प्रातः काल का है ऋषिकुंड में जाने की कोई एंट्री फीस नहीं है बस जब भी आप इस मंदिर में जाएं आप अपना सर ढक कर जाए।

चोटी वाला रेस्टोरेंट

चोटी वाला रेस्टोरेंट जी हां अगर आप ऋषिकेश आ रहे हैं और अपने चोटी वाले का खाना नहीं खाया तो अपने डेफिनेटली कुछ ना कुछ मिस जरूर किया है चोटी वाला रेस्टोरेंट राम झूले के पास पड़ता है और यह रेस्टोरेंट 1958 में बना था तभी से इस रेस्टोरेंट को वही जनरेशन चलती आ रही है और इसीलिए इस जगह का स्वाद 50 सालों से एक ही जैसा है चोटी वाले की कोई ब्रांच नहीं है सिर्फ ऋषिकेश और हरिद्वार में ही आप चोटी वाले का खाना खा सकते हैं चोटी वाला रेस्टोरेंट जब ऋषिकेश में खुला था तो इसके ऑनर से इसकी ब्रांडिंग अलग तरीके से करने का सोचा इसीलिए उन्होंने एक चोटी वाले बाबा अपने रेस्टोरेंट के सामने बिठा दिए जिनकी मोटी मोटी आंखें और एक बहुत ही लंबी चोटी है इसी में एस्कॉर्ट ने पर्यटकों को बहुत ही ज्यादा लुभाया और तभी से इस रेस्टोरेंट का नाम चोटी वाले रेस्टोरेंट के नाम से मशहूर है इस रेस्टोरेंट की टाइमिंग है सुबह 7:30 बजे से लेकर शाम को 11:00 बजे तक और यहां पार्किंग की सुविधा नहीं है इसलिए अगर आप यहां पर आए तो या तो पैदल आए या फिर ई रिक्शा से क्योंकि रेस्टोरेंट बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है तो यहां पर आपको वेटिंग करनी पड़ सकती है।

लक्ष्मण झूला

लक्ष्मण झूला ऋषिकेश की सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है यह बनवाया था अंग्रेजों अपनी सुविधा के लिए लक्ष्मण झूला करीब करीब 90 साल पुराना है 1923 में जब ब्रिटिश गवर्नमेंट को इस झूले की जरूरत आन पड़ी तभी झूले की नींव रखी गई थी और गंगा नदी पानी के तेजबहाव के कारण इसकी नीव दो बार ढह चुकी थी और 1930 में कहीं जाकर इस पुल का निर्माण हुआ लक्ष्मण झूला तकरीबन 450 फीट लंबा है और यह माना जाता है कि राम जी के छोटे भाई लक्ष्मण जी ने यहां पर जूट का पुल बनाया था और उस पर बैठकर तपस्या की थी इसलिए पुल का नाम लक्ष्मण झूला पड़ा है लक्ष्मण झूला पहुंचने के लिए आप यहां की लोकल बस टैक्सी या ई रिक्शा कर सकते हैं जो की ऋषिकेश के बस स्टॉप से आपको 20 से ₹30 में लक्ष्मण झूला पहुंचा देगी लक्ष्मण झूले के साथ यहां पर राम झूला भी बहुत फेमस है जो की 750 फीट लंबा है और इसका निर्माण भी 1993 में हुआ था लक्ष्मण झूला 24 घंटे खुला होता है और यहां आने की कोई फीस नहीं है लेकिन यहां आने का सबसे बेस्ट टाइम है सुबह 5:00 बजे या रात को 10:00 बजे तो यह थी ऋषिकेश की 10 सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थल जहा आप जीवन में एक बार जरूर घूमने जाये।

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